राजस्थान 'छोटी सरकार': 14,635 पंचायतों और 450 समितियों में मचेगा चुनावी शोर


राजस्थान समाचार: 'छोटी सरकार' के महादंगल का शंखनाद, मार्च में होंगे चुनाव

जयपुर | 

राजस्थान में पिछले एक साल से प्रशासकों के अधीन चल रही ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों में अब चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश की 14,635 ग्राम पंचायतों, 450 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों में चुनाव कराने का रोडमैप तैयार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, आयोग को 15 अप्रैल 2026 तक चुनावी प्रक्रिया पूरी करनी है।

मुख्य चुनाव कार्यक्रम (संभावित तिथियाँ):

  • 25 फरवरी: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन।

  • 28 फरवरी - मार्च प्रथम सप्ताह: चुनाव की आधिकारिक घोषणा और प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू होना।

  • मतदान: मार्च के विभिन्न चरणों में होने की संभावना।

वोटिंग का नया स्वरूप: बैलेट और EVM का संगम

राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार मतदान के लिए मिश्रित प्रणाली अपनाई है:

  1. पंच और सरपंच: इन पदों के लिए मतदान बैलेट पेपर (मतपत्र) के जरिए होगा।

  2. जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्य: इनका चुनाव EVM के माध्यम से कराया जाएगा। हालांकि, ईवीएम की कमी होने की स्थिति में आयोग ने वैकल्पिक रूप से बैलेट बॉक्स तैयार रखने के निर्देश भी कलेक्टरों को दिए हैं।

बढ़ा हुआ चुनावी दायरा (परिसीमन का प्रभाव)

नए परिसीमन के बाद राजस्थान में जन प्रतिनिधियों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है:

  • नई ग्राम पंचायतें: 3,441 नई पंचायतों के गठन के बाद अब कुल सरपंच पदों की संख्या 14,635 हो गई है।

  • वार्ड पंच: 1 लाख से अधिक वार्ड पंच चुने जाएंगे, जिनमें 45,000 से अधिक पद नए सृजित हुए हैं।

  • नई समितियाँ: 85 नई पंचायत समितियां और 8 नई जिला परिषदें इस बार पहली बार चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगी।

प्रत्याशियों के लिए खर्च की सीमा दोगुनी

आयोग ने चुनावी खर्च की सीमा में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे:

  • सरपंच प्रत्याशी: ₹1 लाख तक खर्च कर सकेंगे (पहले ₹50,000)।

  • पंचायत समिति सदस्य: ₹1.5 लाख (पहले ₹75,000)।

  • जिला परिषद सदस्य: ₹3 लाख (पहले ₹1.5 लाख)। 

     हाई कोर्ट की डेडलाइन
    राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को सख्त निर्देश दिए हैं कि 15 अप्रैल 2026 तक चुनावी प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। अधिकांश पंचायतों का कार्यकाल एक साल पहले खत्म हो चुका है, इसलिए इन चुनावों को जल्द कराना अनिवार्य है।