सिस्टम की साठगांठ या लापरवाही? 11 घंटे बाद पहुंचा खाद्य विभाग, ग्रामीणों ने पूछा— "साहब, मिलावटखोरों को बचाने के लिए इतनी देरी क्यों?"

भैंसलाना का नकली घी कांड — ग्रामीणों की सजगता बनाम सिस्टम की सुस्ती

स्थान: भैंसलाना, रेनवाल (जयपुर)

रेनवाल थाना इलाके के भैंसलाना गांव में शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे नकली घी के अवैध कारोबार का खुलासा हुआ। ग्रामीणों ने ड्योड़ी निवासी ओमपाल कुमावत को पकड़कर पुलिस के हवाले किया। बताया जा रहा है कि आरोपी ओमपाल कुमावत पिछले 7–8 महीनों से भैंसलाना गांव के मुख्य बाजार में स्थित विजय साखला का मकान किराये पर लेकर नकली घी बनाने व बेचने का अवैध धंधा कर रहा था।
ग्रामीणों को लंबे समय से नकली घी की आशंका थी। शुक्रवार सुबह इसकी पुष्टि होने पर ग्रामीणों ने तत्काल रेनवाल थाना पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी ओमपाल कुमावत को हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने मौके से नकली घी बनाने में उपयोग होने वाले सामान व तैयार माल को जब्त किया है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है तथा यह पता लगाया जा रहा है कि नकली घी की सप्लाई किन-किन क्षेत्रों में की जा रही थी।

  मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग को भी सूचना देने के बाद भी करीब 11 घंटे बाद टीम मौके पर पहुंची । खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम देरी से पहुंचने पर ग्रामीणों ने मिली भगत का आरोप लगाया

मुख्य आरोपी: ओमपाल कुमावत (निवासी ड्योड़ी)

1. फैक्ट्री का सेटअप और संचालन

आरोपी ओमपाल कुमावत ने गांव के मुख्य बाजार में विजय साखला का मकान किराये पर ले रखा था। बाहर से देखने पर यह एक सामान्य घर लगता था, लेकिन अंदर नकली घी का एक संगठित नेटवर्क चल रहा था।

  • ब्रांडेड धोखाधड़ी: आरोपी 'सरस' और 'कृष्णा' जैसे राजस्थान के सबसे भरोसेमंद ब्रांडों के हूबहू दिखने वाले नकली रैपर और डिब्बे तैयार रखता था।

  • समय अवधि: यह अवैध कारोबार पिछले 7-8 महीनों से बेधड़क चल रहा था, जिससे आसपास के कई क्षेत्रों में हजारों लीटर मिलावटी घी सप्लाई होने की आशंका है।

2. घटनाक्रम: सुबह 9 बजे से रात 11 बजे तक

  • सुबह 09:00 बजे: ग्रामीणों ने आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा और मकान को घेर लिया। रेनवाल पुलिस को सूचना दी गई।

  • सुबह 10:00 बजे: पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लिया।

  • दिन भर का इंतजार: ग्रामीणों ने तुरंत खाद्य विभाग (Food Safety Department) को सूचना दी, लेकिन टीम घंटों तक नहीं पहुंची।

  • रात 10:30 बजे: खाद्य विभाग की टीम करीब 11-12 घंटे की देरी से गांव पहुंची, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।


3. ग्रामीणों के संगीन आरोप: "साक्ष्यों की हत्या"

वीडियो रिपोर्ट और मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों (मदन जी व अन्य) के अनुसार, पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही:

  • केमिकल का डिस्पोजल: ग्रामीणों का आरोप है कि जिस केमिकल और सेंट (Essence) से घी में खुशबू पैदा की जाती थी, पुलिस ने उसे टॉयलेट में फ्लश कर दिया ताकि कोर्ट में आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत न बच सके।

  • दुर्गंध: ग्रामीणों ने बताया कि केमिकल बहाने के कारण पूरी गली में तीखी और अजीब दुर्गंध फैल गई थी।

  • खाली डिब्बों की जब्ती: ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब खाद्य विभाग आया, तो अंदर केवल पैक डिब्बे और रैपर दिखाए गए, जबकि मुख्य 'मिलावटी सामग्री' (Raw Material) को पहले ही खुर्द-बुर्द कर दिया गया।


4. तकनीकी पक्ष: कैसे बनता था यह नकली घी?

पकड़े गए सामान के आधार पर यह अंदेशा जताया जा रहा है कि आरोपी निम्नलिखित प्रक्रियाओं का उपयोग कर रहा था:

  1. बेस ऑयल: घटिया क्वालिटी का पाम ऑयल या रिफाइंड तेल।

  2. हाइड्रोजनेटेड फैट: जिसे सामान्य भाषा में 'डालडा' कहा जाता है, उसे दानेदार बनाने के लिए मिलाया जाता था।

  3. केमिकल सेंट (Essence): असली गाय/भैंस के घी जैसी खुशबू देने के लिए खतरनाक रसायनों का मिश्रण।

  4. कलरिंग एजेंट: घी को पीलापन देने के लिए कृत्रिम रंगों का प्रयोग।

5. विभाग की दलील बनाम जनता का आक्रोश

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने देरी का कारण संसाधनों की कमी या सूचना मिलने में देरी बताया, लेकिन ग्रामीणों ने इसे "मिलीभगत और लेपापोती" करार दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब "शुद्ध के लिए युद्ध" अभियान सरकारी प्राथमिकता है, तो ऐसी बड़ी कार्रवाई में 11 घंटे की देरी क्यों हुई?


6. "शुद्ध के लिए युद्ध" पर सवाल: 11 घंटे की सुस्ती

इस पूरी कार्रवाई ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का गुस्सा प्रशासन पर जमकर फूटा:

  • देरी का रिकॉर्ड: सुबह 11 बजे ग्रामीणों द्वारा घेराबंदी करने के बावजूद खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) की टीम रात 10:30 बजे पहुंची।

  • साक्ष्यों के साथ 'खेल': स्थानीय निवासियों (मदन जी व अन्य) ने आरोप लगाया कि पुलिस ने टीम के आने से पहले मुख्य केमिकल और सेंट (Essence) को टॉयलेट में बहाकर नष्ट कर दिया। जब टीम पहुंची, तो उन्हें केवल 500 ग्राम घी ही 'मौके' पर मिलने का दावा किया गया।

  • ग्रामीणों का विरोध: ग्रामीणों ने इस 'लीपापोती' के खिलाफ सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और पुलिस व विभाग के बीच मिलीभगत के आरोप लगाए।


7. आगे क्या?

  • सैंपल की जांच: खाद्य विभाग ने जो नमूने लिए हैं, उन्हें लैब भेजा जाएगा।

  • आरोपी से पूछताछ: पुलिस आरोपी के मोबाइल रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि सप्लाई चेन (होलसेलर्स और रिटेलर्स) का पता लगाया जा सके।

  • आंदोलन की चेतावनी: ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस और विभाग ने निष्पक्ष जांच नहीं की, तो वे जयपुर कूच करेंगे और उच्च अधिकारियों का घेराव करेंगे।
    https://youtu.be/6hXSIEDf1hI?si=uZ12mT-tWtkai94c
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