पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पेश कर पानी की कीमत वसूलने की मांग, राजस्थान सरकार मार्च में ही रॉयल्टी देने से कर चुकी है इनकार।
पंजाब ने फिर मांगे राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपए! राजस्थान और पंजाब के बीच नहरी पानी की रॉयल्टी को लेकर एक बार फिर सियासी टकराव के आसार बन गए हैं। पंजाब सरकार ने राजस्थान से पानी के बदले 1 लाख 44 हजार करोड़ रुपए की रॉयल्टी की मांग दोहराई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा के विशेष सत्र में यह मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि साल 1960 तक राजस्थान पानी की रॉयल्टी देता रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब राजस्थान पंजाब से मुफ्त पानी लेकर आगे बेच रहा है। मान ने इसे कारोबार बताते हुए कहा कि पंजाब से कच्चा माल मुफ्त लिया जा रहा है और उससे कमाई की जा रही है। वहीं, पंजाब के सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश कर राजस्थान से पानी की कीमत वसूलने और केंद्र सरकार से हर साल भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की। प्रस्ताव में तर्क दिया गया कि सतलुज, रावी और व्यास नदियां राजस्थान से होकर नहीं गुजरतीं, जबकि पंजाब खुद जल संकट का सामना कर रहा है। हालांकि, राजस्थान सरकार पहले ही इस मांग को खारिज कर चुकी है। 20 मार्च को राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने स्पष्ट कहा था कि पंजाब की यह मांग असंवैधानिक है और राजस्थान सरकार कोई रॉयल्टी नहीं देगी। पानी के बंटवारे से जुड़ा साल 1920 का समझौता ब्रिटिश सरकार, बहावलपुर रियासत और बीकानेर रियासत के बीच हुआ था। अब पंजाब विधानसभा में यह मुद्दा दोबारा उठने से दोनों राज्यों के बीच विवाद गहराने की आशंका है।